Tuesday, 11 December 2012

जीस देश का राजा व्यपारी उस देश की प्रजा भीखारी

मैंने अपने दादा -दादी से एक काहानी सुनी थी काहानी मे एक पात्र था एक राज्य  का राजा था | उसके मन मे लालच इस कदर भर जाता है की राज्य  मे जितना भी  धन है वो उसके खजाने का हिस्सा कैसे बने इसी बात को ले कर वो अपना ध्यान केन्द्रीत  करने लगा |  और छोटे से छोटे व्यापार पर कब्जा करने की फिराक मे राज्य मे भय का वातावरण पैदा हो गया और छोटे छोटे व्यपारी और दुकानदार भी राज्य से पलाकर  दूसरे राज्य मे अपना जीवन यापन करने लगे | एक समय एसा आ गया की आम लोगो को पूरी तरह राजा पर निर्भर होना पड़ गया और राजा लोगो की आपुर्ती कर पाने मे असफल हो गया | यही स्थीती आज पूरे देश मे पैदा हो रही है सबसीडी की दुकान खोल कर सरकारे लोगो को अपने ऊपर निर्भर तो  कर ही रही है दूसरी तरफ लोगो को होने वाली आपुर्ती पूरी कर पाने मे असफल है |

               और आम आदमी गलत सरकारी नीतीयों के कारण छोटे से छोटा व्यवसाय करने मे डरने लगे है | और अपने आप को सरकारी नौकरीयों पर निर्भर करते जा रहे है | और वोटो की राजनीती के कारण सरकारे उतनी नौकरीया या पद  अर्जित नही करती ताकी लोग उनके पास आते रहे और रोजी रोटी के लीये उनपर निर्भर हो जाये और व्यवसायो पर तो पहले ही वो नीयत्रीण कर चुकी होती है और आम लोग भी सब्सीडी के चलते काम करने से बचते है | और पूरी तरह सरकार पर निर्भर हो कर राजनीती वशीकरण जैसी स्थीती मे पाहुच जाते है | दूसरे शब्दो मे सरकार सब्सीडी का खेल कर अपना वोट बैंक तयार करती है | और लोग बीना काम कीए सब्सीडी का लाभ लेने के लीये सरकार को बनाए रखते है | इस सब का शीकार हो रहा है | मध्यम वर्गी कीसान ,दुकान दार ,व्यपरी , पूरा मध्यम वर्ग और बीना काम कीए कई सरकरी योजनाओ से सब कुछ पा  लेने के एक रीवाज़ ने श्रम शक्ति को नष्ट करने का मानो बीड़ा उठा लीआ है | यह एसी राषटीय छ्ती है जिससे वीकास , निर्माण कार्य , क्रीषीय उत्पादन , औधोगीक ऊटपादन तेजी से नीचे आ राहा है |  और इस सब की वजह से हमारी निर्यात घट रही है | और वीदेशी मुद्रा के अभाव मे हमारा रुपया रोज नीचे आ राहा और अंतराष्टीय बाजार मे हामारी साक भी |इस सब की वजह से हमारे ऊपर विदेशी कर्ज बड़ाता जा राहा है | और फ़ीर सरकार टैक्स पर टैक्स लगाते चले जाती है जिससे रोज़मर्रा की चीजे महगी होती है |  सब्सीडी पा रहे लोगो के लीये तो सरकार चीजे  उपलब्ध करा देती है पर मध्यम वर्ग की पहुच से वो बाहार हो जाती है | और उसे पाने के लीये वो जद्दो जहद करते हुए आत्म हत्या तक चले जाते है | और ये सब वोट खरीदने के लीये कीए जा रहे सब्सीड़ी के खेल की वजह से होता है |  व्यापारो पर सरकारी  और राजनीतीक व्यकतीयों के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष नियत्र्ण है| साथ ही साथ सरकारो के व्यवसाई होने के कारण भी ये होता है   |
            इससे ये स्पष्ट होता है की रामायण मे लीखा  सत  प्रतिशत सही है की जिस देश का  राजा व्यापारी उस देश की प्रजा भीखारी ................................................ तो दोस्तो समझो ,जागो और अपना भला खुद करो कोई व्यक्ती , सरकार या राजनीतीक पार्टीया आप को देश को माहान , उन्न्त ,और अग्रणीय नाही बना सकती हम सब को देश ही मे अधीक से अधीक काम करना चाहीये सरकार से कीसी प्रकार की सब्सीड़ी की आशा कीए बगैर अपने आप हम कर्ज मुक्त और वीक्सीत हो जायेगे | और हमे हर चीज वाजीब कीमत पर मीलेगी इससे उत्पादन बढेगा, निर्यात बढ़ेगा और वीदेशी मुद्रा का भंडार भी | दुनीया मे हमारा भरोसा बढ़ेगा तब  वीकसीत देश के नागरीक कहलायेगे |

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